Siddha Makardhwaj Special No. 1 (S.M.Y.)

Indication: This is the best medicine in the world, a physical strength enhancer, it is a rasayan drug to strengthen the vascular system, it is used for physical-mental weakness, heart disorders, nervous diseases, mania, epilepsy, unconsciousness, pneumonia, respiratory problems of the lungs. There is quick benefit in diseases, pulse impairment, cerebral encephalopathy, premature ejaculation, premature aging, etc. It is also used to protect against heart failure.

Dose: 1 to 2 tablets evening and morning a day or as directed by the physician.

Available in: 5 tabs,10 tabs & 25 tabs.

घटक द्रव्य – मकरध्वज ;षड़गुण-बलिजारितद्ध
33.33:, स्वर्ण भस्म 8.334ः कस्तूरी 8ः
333: अम्बर 16.666:, अभ्रक भस्म सहस्त्रपुटीद्ध 33.334ः

गुणधर्म – औषधि जगत की यह श्रेष्ठ दवा है।

अनुपान भेद से प्रायः सभी रोगो में इसका
सफल प्रयोग होता है। शारीरिक एवं मानसिक दौर्बल्य को मिटाकर शरीर में नई शक्ति और स्फूर्ति का संचार
करता है। पौरूष को बढाने तथा शरीर को कान्तिमय बनाने के लिये सुप्रसिद्ध है। यह हृदय एवं स्नायु मण्डल
को ताकतवर बनाने में आशु लाभकारी है। निमोनियां, ज्वर, सर्दी, जुकाम, कफ, खासी, श्वास, फेफडे़ विकार,
नाड़ी क्षीणता, शीतांग आदि रोगों में इसका प्रयोग सफल सिद्ध होता है। उन्माद अपस्मार, मृगी, मुर्छा मस्तिष्क,
दौर्बल्य में इससे अच्छा लाभ होता है। यह शरीर के वजन को निश्चित रुप से बढ़ाता है तथा धातु दौर्बल्य आदि
को दूर करता है। बुढापे में इसका प्रयोग परम गुणकारी है। यह सर्वोत्तम रसायन बाजीकरण एवं योगवाही है।
साधन सम्पन्न व्यक्तियों को इसके प्रयोग से अवश्य लाभ उठाना चाहिए।

मात्रा और अनुपान – वयस्कों को 125 मिग्रा. (1 रत्ती) 3 साल के बालकों को 30 मिग्रा. (चैथाई रत्ती) तक 4
से 10 वर्ष की उम्र वालों को 62 मिग्रा. (आधी रत्ती) मात्रा में सुबह-शाम दें। रोगानुसार मधु, मक्खन, मलाई, दुध,
पान रस आदि।
अनुपान विशेष – फेफडे़ के विकार दिल-दिमाग की कमजोरी कफ खासी आदि में शर्मायु च्यवनप्राश स्पेशल
12 ग्राम (1 तोला) या सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम के साथ मिलाकर मधु से चटाना विशेष गुणकारी है। ज्वर, सर्दी,
जुकाम आदि मे चैसठ प्रहरी पीपल मधु के साथ निमोनियां में वासा-रस मधु तथा हृदय की दुर्बलता में 125
मिग्रा नागार्जुनाभ्र रस मिलाकर मधु से चटाना तथा भोजन के बाद अर्जुनारिष्ट पीना उत्तम है। नाडी, क्षीणता,
शीतांग आदि में पान या तुलसी रस के साथ, मानसिक विकार, उन्माद, अपस्मार, मुर्छा आदि में ब्राह्म रसायन 12
ग्राम (1 तोला) या शर्मायु शंखपुष्पी सीरप के साथ लेना तथा भोजन के बाद अश्वगन्धारिष्ट पीना विशेष गुणकारी
है।
पथ्य – दूध, फल आदि स्निग्ध, मधुर, सात्विक एवं बलकारी सुपाच्य भोजन दें
तथा खट्टे नमकीन उष्ण एवं क्षारयुक्त पदार्थो से परहेज करें।
केवल रजिस्टर्ड चिकित्सकों एवं चिकित्सालयों के प्रयोगार्थ

मात्रा: 1 से 2 टेबलेट दिन में 2 बार या चिकित्सक के परामर्शानुसार।

नोट – गोली को चबाकर या पीसकर/तोड़कर प्रयोग करने से औषधि की उपयोगिता बढ़ जाती है।

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Indication: This is the best medicine in the world, a physical strength enhancer, it is a rasayan drug to strengthen the vascular system, it is used for physical-mental weakness, heart disorders, nervous diseases, mania, epilepsy, unconsciousness, pneumonia, respiratory problems of the lungs. There is quick benefit in diseases, pulse impairment, cerebral encephalopathy, premature ejaculation, premature aging, etc. It is also used to protect against heart failure.

Dose: 1 to 2 tablets evening and morning a day or as directed by the physician.

Available in: 5 tabs,10 tabs & 25 tabs.

घटक द्रव्य – मकरध्वज ;षड़गुण-बलिजारितद्ध
33.33:, स्वर्ण भस्म 8.334ः कस्तूरी 8ः
333: अम्बर 16.666:, अभ्रक भस्म सहस्त्रपुटीद्ध 33.334ः

गुणधर्म – औषधि जगत की यह श्रेष्ठ दवा है।

अनुपान भेद से प्रायः सभी रोगो में इसका
सफल प्रयोग होता है। शारीरिक एवं मानसिक दौर्बल्य को मिटाकर शरीर में नई शक्ति और स्फूर्ति का संचार
करता है। पौरूष को बढाने तथा शरीर को कान्तिमय बनाने के लिये सुप्रसिद्ध है। यह हृदय एवं स्नायु मण्डल
को ताकतवर बनाने में आशु लाभकारी है। निमोनियां, ज्वर, सर्दी, जुकाम, कफ, खासी, श्वास, फेफडे़ विकार,
नाड़ी क्षीणता, शीतांग आदि रोगों में इसका प्रयोग सफल सिद्ध होता है। उन्माद अपस्मार, मृगी, मुर्छा मस्तिष्क,
दौर्बल्य में इससे अच्छा लाभ होता है। यह शरीर के वजन को निश्चित रुप से बढ़ाता है तथा धातु दौर्बल्य आदि
को दूर करता है। बुढापे में इसका प्रयोग परम गुणकारी है। यह सर्वोत्तम रसायन बाजीकरण एवं योगवाही है।
साधन सम्पन्न व्यक्तियों को इसके प्रयोग से अवश्य लाभ उठाना चाहिए।

मात्रा और अनुपान – वयस्कों को 125 मिग्रा. (1 रत्ती) 3 साल के बालकों को 30 मिग्रा. (चैथाई रत्ती) तक 4
से 10 वर्ष की उम्र वालों को 62 मिग्रा. (आधी रत्ती) मात्रा में सुबह-शाम दें। रोगानुसार मधु, मक्खन, मलाई, दुध,
पान रस आदि।
अनुपान विशेष – फेफडे़ के विकार दिल-दिमाग की कमजोरी कफ खासी आदि में शर्मायु च्यवनप्राश स्पेशल
12 ग्राम (1 तोला) या सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम के साथ मिलाकर मधु से चटाना विशेष गुणकारी है। ज्वर, सर्दी,
जुकाम आदि मे चैसठ प्रहरी पीपल मधु के साथ निमोनियां में वासा-रस मधु तथा हृदय की दुर्बलता में 125
मिग्रा नागार्जुनाभ्र रस मिलाकर मधु से चटाना तथा भोजन के बाद अर्जुनारिष्ट पीना उत्तम है। नाडी, क्षीणता,
शीतांग आदि में पान या तुलसी रस के साथ, मानसिक विकार, उन्माद, अपस्मार, मुर्छा आदि में ब्राह्म रसायन 12
ग्राम (1 तोला) या शर्मायु शंखपुष्पी सीरप के साथ लेना तथा भोजन के बाद अश्वगन्धारिष्ट पीना विशेष गुणकारी
है।
पथ्य – दूध, फल आदि स्निग्ध, मधुर, सात्विक एवं बलकारी सुपाच्य भोजन दें
तथा खट्टे नमकीन उष्ण एवं क्षारयुक्त पदार्थो से परहेज करें।
केवल रजिस्टर्ड चिकित्सकों एवं चिकित्सालयों के प्रयोगार्थ

मात्रा: 1 से 2 टेबलेट दिन में 2 बार या चिकित्सक के परामर्शानुसार।

नोट – गोली को चबाकर या पीसकर/तोड़कर प्रयोग करने से औषधि की उपयोगिता बढ़ जाती है।

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